हलाला-बहुविवाह को गैरकानूनी घोषित करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में 3 पिटीशन पर सुनवाई आज

नई दिल्ली.   सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मुस्लिम बहुविवाह और निकाह हलाला के खिलाफ दायर की गईं याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इनमें इन प्रक्रियाओं को गैरकानून घोषित करने की मांग की गई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक देने को गैरकानूनी घोषित कर चुका है। 
1) भाजपा नेता और 2 मुस्लिम महिलाओं ने लगाईं याचिकाएं - भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय। - दिल्ली की नफीसा खान।  - दिल्ली की समीना बेगम। 
2) नफीसा की क्या है मांग? - आईपीसी की धाराएं सभी नागरिकों पर बराबरी से लागू होने चाहिए। ट्रिपल तलाक आईपीसी की धारा 498A के तहत क्रूरता है। निकाह 
हलाला धारा 375 के तहत बलात्कार है। बहुविवाह आईपीसी की धारा 494 के तहत अपराध है। लिहाजा अदालत उन्हें खारिज करे। 
संविधान के मुताबिक जब दो नियमों में विरोधाभास हो तो पर्सनल एक्ट पर सार्वजनिक कानून ही लागू होता है।
समीना की दो बार शादी, दो बार तलाक हुआ - दक्षिणी दिल्ली की रहने वाली समीना बेगम ने पिटीशन में कहा कि 1999 में जावेद अनवर से उनकी शादी हुई थी। दो बेटे हुए। पति ने उन पर खूब जुल्म किए। उन्होंने थाने में शिकायत की तो पति ने तलाकनामा भेज दिया।
- समीना ने 2013 में रियाजुद्दीन से निकाह किया जो पहले से शादीशुदा था। रियाजुद्दीन ने समीना को फोन पर तलाक दे दिया। उस वक्त वह प्रेग्नेंट थी। 
पर्सनल लॉ नैतिकता पर खरा उतरे - समीना ने अपनी याचिका में कहा कि भारत में धार्मिक समुदायों को अपने-अपने निजी कानूनों के मुताबिक चलने की इजाजत है। बेशक धार्मिक समुदायों के अलग कानून हो सकते हैं, लेकिन पर्सनल लॉ को संवैधानिक वैधता और नैतिकता पर खरा उतरना चाहिए। यह संविधान की धारा 14, 15 और 21 का उल्लंघन नहीं कर सकते।
क्या है निकाह हलाला, बहुविवाह? - मुस्लिमों में हलाला या निकाह हलाला एक रस्म है। शरियत के मुताबिक, कोई तलाकशुदा महिला अपने पहले पति से तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकती जब तक कि वह किसी और से शादी करके तलाक न ले ले।
- मुस्लिमों को कानून में एक से ज्यादा शादी करने की छूट दी गई है। इसे बहुविवाह कहते हैं। 

प्रदीप पाण्डेय (एडवोकेट)
मोबाइल: 9971505611

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